अमेरिका ने चीन को दुर्लभ अमेरिका ने चीन को चेतावनी दी है कि यदि चीन दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के निर्यात को लेकर अपने नियंत्रण को और सख्त करेगा तो अमेरिका टैरिफ बढ़ाने के कदम से पीछे नहीं हटेगा। इस वजह से दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ने की संभावना है।
अमेरिका ने चीन को दुर्लभ अमेरिका चीन व्यापार तनाव का इतिहास
#अमेरिका-चीन व्यापार तनाव 2018 में शुरू हुआ जब अमेरिका ने चीन पर अनुचित व्यापार प्रथाओं और बौद्धिक संपदा चोरी के आरोप लगाते हुए चीनी वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाए। इस कदम के जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर टैरिफ बढ़ाए, जिससे दोनों देशों के बीच लंबे समय तक व्यापार युद्ध चला। यह विवाद वैश्विक आर्थिक स्थिरता और सप्लाई चेन पर गहरा असर डालता रहा है।
अमेरिका की चेतावनी और उसके कारण

अमेरिका ने चीन को चेतावनी दी है कि अगर चीन ने दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के निर्यात पर नियंत्रण और कड़े कर दिए तो वह टैरिफ बढ़ाने से पीछे नहीं हटेगा। यह कदम अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा के लिए अहम है।
चीन के निर्यात नियंत्रण के नए नियम
चीन ने हाल ही में खनन, प्रसंस्करण और तकनीकी उपकरणों के
निर्यात पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं।
ये नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का वैश्विक महत्व
दुनिया में लगभग 90% दुर्लभ पृथ्वी खनिज चीन से आते हैं,
जो आधुनिक तकनीक, रक्षा, और स्वच्छ
ऊर्जा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
अमेरिका-चीन के बीच व्यापार गतिरोध
इन खनिजों को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से
व्यापारिक तनाव है, और यह कदम इसे और बढ़ा सकता है।
व्यापार युद्ध के प्रभाव
टैरिफ बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो
सकती है, जिससे तकनीकी उद्योगों
के उत्पादन पर असर पड़ेगा।
भारत और अन्य देशों की भूमिका
अमेरिका ऐसे वैकल्पिक स्रोत तलाश रहा है, जिसमें
भारत को भी शामिल किया जा सकता है।
भारत के लिए यह रणनीतिक और आर्थिक अवसर भी है।
भविष्य की संभावनाएं
दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए संवाद और समझौते
की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जिससे वैश्विक
आर्थिक स्थिरता बनी रह सके।











