AI की काली सच्चाई महिलाओं व बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं। इस ब्लॉग में जानें इनसे बचने के 5 आसान तरीके, पहचान के उपाय और सुरक्षा टिप्स।
AI की काली सच्चाई महिलाओं-बच्चों पर खतरा क्यों
#AI की काली सच्चाई यह है कि डीपफेक तकनीक महिलाओं व बच्चों के चेहरों पर अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल, बदनामी और मानसिक आघात पहुंचा रही। असली जैसी नकली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होकर जिंदगी बर्बाद कर देती हैं। 90-95% डीपफेक नॉन-कंसेंशुअल पोर्न होते हैं, जहां सोशल मीडिया प्रोफाइल फोटोज से चेहरा निकालकर अश्लील वीडियो बनाए जाते हैं। भारत में रश्मिका मंदाना से लेकर आम महिलाओं तक के केस सामने आए, जहां X पर Grok AI का दुरुपयोग कर बिकनी-न्यूड इमेजेस वायरल हुईं। 2025 में साइबर क्राइम 118% बढ़ा, जॉब-रिलेशनशिप बर्बाद हो रहे।
AI का महिलाओं पर हमला

AI डीपफेक महिलाओं के चेहरों पर अश्लील कंटेंट चिपकाकर ब्लैकमेल करता है। बचाव: सोशल मीडिया पर फोटो कम शेयर करें, प्राइवेसी सेटिंग्स टाइट रखें। रिवर्स इमेज सर्च से फेक कंटेंट चेक करें।
बच्चों के लिए डीपफेक खतरा
स्कूल फोटोज से बच्चों के डीपफेक पोर्न वायरल हो रहे। बचाव: पैरेंट्स बच्चों की तस्वीरें पब्लिक न करें। संदिग्ध वीडियो फॉरवर्ड न करें। साइबर सेल में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
पहचानें डीपफेक आसानी से
वीडियो में आंखों की पलकें, दांतों का मूवमेंट अस्वाभाविक लगे तो डीपफेक। बचाव: Google Lens से रिवर्स सर्च करें। वॉटरमार्क या ब्लर चेक करें। फैक्ट-चेक साइट्स का सहारा लें।
कानूनी हथियार डीपफेक के खिलाफ
भारत में IT एक्ट के तहत डीपफेक क्राइम। बचाव cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें। हेल्पलाइन 1930 डायल करें। पुलिस FIR दर्ज कराए। सबूत संभालकर रखें।
तकनीकी बचाव के टूल्स
डीपफेक डिटेक्टर ऐप्स डाउनलोड करें। बचाव: एंटीवायरस
अपडेट रखें। VPN यूज करें। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें।
अनजान लिंक न खोलें।
जागरूकता ही सुरक्षा
परिवार को डीपफेक के बारे में बताएं। बचाव: वॉइस
मॉड्यूलेशन चेक करें। असली आवाज़ का टोन मेल न खाए
तो संदेह। दोस्तों-रिश्तेदारों को अलर्ट करें।
भविष्य के लिए तैयार रहें
AI डीपफेक तेजी से बढ़ रहे। बचाव: प्रोफाइल प्राइवेट रखें।
AI टूल्स से सावधान रहें। साइबर लॉ के नए नियमों
का पालन करें। सुरक्षित इंटरनेट यूज करें।










