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स्मार्टफोन लोकेशन हमेशा ऑन सरकार के प्लान पर गूगल एप्पल का विरोध

On: December 8, 2025 7:48 AM
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स्मार्टफोन लोकेशन हमेशा ऑन

स्मार्टफोन लोकेशन हमेशा ऑन भारत सरकार स्मार्टफोन में A-GPS लोकेशन ट्रैकिंग हमेशा ऑन करने पर विचार कर रही है। गूगल, एप्पल का विरोध, प्राइवेसी खतरे की चिंता। COAI का प्रस्ताव, जांच एजेंसियों को सटीक डेटा।

स्मार्टफोन लोकेशन हमेशा ऑन सरकार क्यों चाहती है सटीक ट्रैकिंग

जांच एजेंसियों को अपराधियों का सटीक स्थान ढूंढने में दिक्कत होती है, क्योंकि मोबाइल टावर डेटा केवल अनुमानित लोकेशन देता है।​ COAI ने A-GPS हमेशा ऑन करने का सुझाव दिया ताकि सैटेलाइट+नेटवर्क से 1 मीटर सटीक डेटा मिले।

प्रस्ताव का पूरा विवरण

स्मार्टफोन लोकेशन हमेशा ऑन
#स्मार्टफोन लोकेशन हमेशा ऑन

सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने सुझाव दिया कि सरकार स्मार्टफोन कंपनियों को A-GPS हमेशा ऑन करने का आदेश दे, ताकि जांच एजेंसियों को 1 मीटर तक सटीक लोकेशन मिले। वर्तमान में मोबाइल टावर डेटा केवल अनुमानित स्थान बताता है। यह नियम यूजर्स को लोकेशन सर्विस बंद करने का विकल्प नहीं देगा।

सरकार क्यों चाहती है सटीक ट्रैकिंग

जांच एजेंसियों को अपराधियों या संदिग्धों का सही स्थान ढूंढने में दिक्कत होती है। COAI का कहना है कि A-GPS से सैटेलाइट और सेलुलर डेटा मिलकर बेहतर नतीजे देंगे। रिलायंस जियो और एयरटेल जैसी कंपनियां इसका समर्थन कर रही हैं।

A-GPS तकनीक कैसे काम करती है

A-GPS सैटेलाइट सिग्नल्स और मोबाइल नेटवर्क का संयोजन इस्तेमाल करती है, जो सामान्य GPS से तेज और सटीक होती है। यह बैटरी कम खर्च करती है लेकिन हमेशा ऑन रहने से लगातार ट्रैकिंग संभव हो जाएगी। दुनिया में ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है।

टेक कंपनियों का कड़ा विरोध

गूगल, एप्पल और सैमसंग ने प्राइवेसी उल्लंघन का हवाला देकर विरोध जताया। ICEA ने कहा कि यह तकनीक निगरानी के लिए नहीं बनी और अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड्स के खिलाफ है। संचार साथी ऐप विवाद के बाद यह नया टकराव है।

प्राइवेसी और सुरक्षा जोखिम

हमेशा ऑन लोकेशन से डेटा मिसयूज, हैकिंग का खतरा बढ़ेगा।

यूजर की हर गतिविधि ट्रैक हो सकेगी, जो निजता के अधिकार

का उल्लंघन है। विशेषज्ञों का मानना है कि

फोन निगरानी डिवाइस बन जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय मानक क्या कहते हैं?

दुनिया के किसी देश में डिवाइस-लेवल

पर GPS अनिवार्य नहीं है। रूस में सरकारी ऐप जरूरी है

लेकिन GPS हमेशा ऑन नहीं। ICEA ने इसे

नियामकीय दुरुपयोग बताया।

आगे क्या होगा? बैठक और संभावनाएं

सरकार ने अभी फैसला नहीं लिया।

जल्द अधिकारियों और कंपनियों के बीच बैठक संभव।

अगर लागू हुआ तो कड़ा विरोध 예상, अन्यथा

वैकल्पिक समाधान ढूंढे जा सकते हैं।

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