रानी मुखर्जी की ‘गुलाम’ फिल्म में अपनी असली आवाज न रख पाने की बात से आंखों में छलके आंसू। जानें आमिर खान के फैसले और करण जौहर के योगदान की भावुक कहानी।
गुलाम में रानी की आवाज डबिंग का फैसला
‘गुलाम’ में रानी मुखर्जी की असली आवाज को निर्देशक विक्रम भट्ट, प्रोड्यूसर मुकेश भट्ट और आमिर खान ने हटाने का फैसला लिया। उन्हें लगा दर्शक रानी की आवाज स्वीकार नहीं करेंगे, इसलिए मोना शेट्टी से डब करवाया गया।
रानी मुखर्जी का ‘गुलाम’ डबिंग कांड

1998 की ब्लॉकबस्टर ‘गुलाम’ में रानी मुखर्जी ने शानदार अभिनय किया, लेकिन उनकी असली आवाज हटाकर मोना शेट्टी से डब करवाया गया। निर्देशक विक्रम भट्ट, प्रोड्यूसर मुकेश भट्ट और हीरो आमिर खान ने फैसला लिया कि दर्शक रानी की आवाज पसंद नहीं करेंगे। जब रानी को यह बात बताई गई, तो उनकी आंखें नम हो गईं। फिर भी, टीम प्लेयर बनकर उन्होंने सहमति दे दी। यह किस्सा हाल ही करण जौहर के शो पर रानी ने साझा किया।
आंसूओं भरी वो मीटिंग
रानी ने बताया कि ‘गुलाम’ उनकी दूसरी फिल्म थी। मीटिंग में जब भट्ट कैंप ने कहा, “तेरी आवाज नहीं चलेगी,” तो रानी रो पड़ीं। आमिर खान ने भी सहमति दी। रानी ने सोचा करियर खत्म, लेकिन उन्होंने हामी भर ली। बाद में करण जौहर ने ‘कुछ कुछ होता है’ में उनकी आवाज रखी, जिससे रानी की पहचान बनी।
करण जौहर का ‘गुलाम’ कनेक्शन
करण जौहर ने स्टेज पर भावुक होकर कहा कि उन्होंने डिस्ट्रीब्यूटर्स की सलाह न मानकर रानी की आवाज रखी। रानी ने आंसू पोछते हुए कहा, “तुम्हारे कारण ही मेरी आवाज इंडस्ट्री में चली।” यह पल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ‘गुलाम’ के बाद यह फैसला रानी के करियर का टर्निंग पॉइंट बना।
आमिर खान का विवादास्पद फैसला
आमिर खान ने ‘गुलाम’ में रानी की आवाज हटाने का समर्थन किया। बाद में उन्होंने माफी मांगी। विक्रम भट्ट ने कहा कि रानी की आवाज डब न होती तो फिल्म डूब जाती। यह 90s की आम प्रथा थी, जहां हीरोइनों की आवाज प्लेबैक सिंगर्स से आती थी।
गुलाम’ की अनकही कहानी
‘गुलाम’ में रानी का किरदार कविता था, जो आमिर के
भाई सिद्धार्थ के लिए मरता है। फिल्म ने 35 करोड़ कमाए,
लेकिन रानी की आवाज का विवाद छिपा रहा। रानी ने इसे
स्वीकार कर अपनी प्रोफेशनलिज्म दिखाई।
आज यह स्टोरी इंस्पिरेशनल है।
रानी की आवाज ने कैसे बदली किस्मत
‘कुछ कुछ होता है’ के बाद रानी की आवाज हिट हुई।
‘गुलाम’ के डबिंग से मिला लेसन: कभी हार मत मानो।
रानी ने कई इंटरव्यू में कहा कि यह अनुभव उन्हें मजबूत बनाया।
फैंस आज उनकी ओरिजिनल वॉइस के दीवाने हैं।
90s बॉलीवुड की डबिंग ट्रेंड
‘गुलाम’ जैसी फिल्मों में डबिंग आम थी। रानी के अलावा
कई एक्ट्रेसेस का यही हाल। लेकिन रानी ने इसे पार कर स्टार बनीं।
यह स्टोरी साबित करती है कि टैलेंट अंततः जीतता है।
क्या आपकी फेवरेट फिल्म में ऐसा हुआ? कमेंट्स में बताएं।











