H1B वीजा ट्रंप नियमों के खिलाफ ट्रंप के H1B वीजा शुल्क बढ़ोतरी पर 20 US राज्यों ने कोर्ट में केस दायर किया। 1 लाख डॉलर फीस को गैरकानूनी बताते हुए चुनौती, जानें पूरा विवाद।” (148 अक्षर)
H1B वीजा ट्रंप नियमों के खिलाफ ट्रंप का विवादास्पद H1B शुल्क फैसला
ट्रंप ने 19 सितंबर 2025 को H1B वीजा पर 1 लाख डॉलर शुल्क लगाने का विवादास्पद फैसला लिया, जो 21 सितंबर से लागू हुआ।
पहले 960-7595 डॉलर शुल्क था, अब यह शिक्षा-स्वास्थ्य क्षेत्रों में कर्मचारी कमी बढ़ा देगा।
H1B वीजा शुल्क पर ट्रंप का नया नियम

ट्रंप प्रशासन ने 19 सितंबर 2025 को H1B वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर शुल्क लगाने की घोषणा की, जो 21 सितंबर से लागू हो गया। पहले शुल्क 960-7595 डॉलर तक था, अब यह भारी बोझ बन गया। 20 डेमोक्रेटिक राज्य इसे गैरकानूनी बता रहे हैं ।
कैलिफोर्निया जैसे राज्य तर्क देते हैं कि यह कुशल विदेशी प्रतिभाओं को रोककर अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा। मुकदमा संघीय अदालत में विचाराधीन है।
20 अमेरिकी राज्यों की एकजुटता
मैसाचुसेट्स, न्यूयॉर्क, इलिनोइस सहित 20 राज्य रॉब बोंटा के नेतृत्व में एकजुट हुए। उनका कहना है कि ट्रंप ने कांग्रेस मंजूरी या APA प्रक्रिया का पालन नहीं किया। यह शुल्क राजस्व जुटाने का अवैध तरीका है ।
ये राज्य H1B पर निर्भर अस्पतालों, यूनिवर्सिटी और स्कूलों की रक्षा चाहते हैं। मुकदमा अमेरिकी संविधान का भी उल्लंघन बताता है।
शुल्क बढ़ोतरी का स्वास्थ्य क्षेत्र पर असर
नया 1 लाख डॉलर शुल्क डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी बढ़ाएगा। सार्वजनिक अस्पताल पहले से स्टाफ की तंगी झेल रहे हैं। राज्य तर्क देते हैं कि यह आवश्यक सेवाओं को खतरे में डाल देगा ।
ट्रंप का दावा है कि यह अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करेगा, लेकिन आलोचक इसे भेदभावपूर्ण मानते हैं।
शिक्षा क्षेत्र को लगेगा झटका
विश्वविद्यालयों में H1B विद्वानों की कमी से रिसर्च प्रभावित होगी। कैलिफोर्निया जैसे राज्य कहते हैं कि कुशल प्रतिभाएं अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं। 1 लाख शुल्क सार्वजनिक स्कूलों पर बोझ डालेगा ।
मुकदमे में मांग है कि नियम तुरंत रद्द हो, अन्यथा स्थायी नुकसान होगा।
कानूनी आधार और ट्रंप प्रशासन पर आरोप
राज्यों का मुख्य तर्क: ट्रंप ने प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम
(APA) का उल्लंघन किया। ऐतिहासिक रूप से H1B शुल्क केवल कार्यक्रम
लागत तक सीमित रहा। कांग्रेस की मंजूरी के बिना यह अमान्य है ।
संघीय आव्रजन कानूनों का भी उल्लंघन होने का दावा किया गया। कोर्ट फैसला जल्द आ सकता है।
भारतीय IT पेशेवरों पर प्रभाव
भारत से अधिकांश H1B आवेदक IT क्षेत्र के हैं।
शुल्क बढ़ने से कंपनियां जैसे TCS, Infosys प्रभावित होंगी।
20 राज्यों का मुकदमा सफल हुआ तो राहत मिलेगी ।
ट्रंप की नीति अमेरिका-फर्स्ट पर जोर देती है, लेकिन राज्य इसे हानिकारक बता रहे।
आगे की संभावनाएं और अपडेट
मुकदमा कैलिफोर्निया फेडरल कोर्ट में है, निर्णय ट्रंप नीतियों को प्रभावित कर सकता है।
राज्य मांग रहे हैं कि शुल्क रद्द हो। INS एजेंसी के इनपुट से खबर मजबूत हुई ।
IT पेशेवर अब वीजा प्रक्रिया पर नजर रखें, वैकल्पिक देशों पर विचार करें।











