पुलवामा NIA कोर्ट ने आतंकी सख्त फैसला तीन आतंकी मददगारों को 3-3 साल कैद। UA(P) एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए सहयोगी, जानें पूरी डिटेल्स।
पुलवामा NIA कोर्ट ने आतंकी सजा का आधार UA(P) एक्ट की धाराएं
ये धाराएं सदस्यता, फंडिंग और आतंकी गतिविधियों में सहायता को कवर करती हैं, जहां सबूतों जैसे गवाह बयान और तकनीकी प्रमाणों पर फैसला आधारित था।
आतंकी मददगारों को 3 साल जेल

31 दिसंबर 2025 को पुलवामा NIA कोर्ट ने महराज उद दीन मीर, फिरदौस अहमद भट और इरशाद अहमद मलिक को UA(P) एक्ट के तहत दोषी ठहराया। वे प्रतिबंधित संगठनों को आश्रय देते थे। यह फैसला आतंक के खिलाफ जीत है।
पुलवामा सजा का कानूनी आधार समझें
NIA अदालत ने धारा 19 (सदस्यता), 38 (फंडिंग) और 39 (सहायता) लागू कीं। सबूतों में गवाह और तकनीकी डेटा शामिल। 3 साल साधारण कैद + जुर्माना। कश्मीर में ऐसे केस बढ़ रहे हैं।
कौन हैं पुलवामा के ये तीन आतंकी मददगार
महराज उद दीन मीर मुख्य आरोपी, ठिकाना मुहैया किया। फिरदौस और इरशाद सपोर्ट रोल में। NIA जांच ने उनके लिंक उजागर किए। सजा: सभी को 3-3 साल।
पुलवामा सजा से कश्मीर आतंकवाद पर क्या असर
यह फैसला स्थानीय सहयोगियों को डराएगा। Pulwama Police की मेहनत रंग लाई। भविष्य में और गिरफ्तारियां संभव। शांति की दिशा में कदम।
पुलवामा केस में 3 दोषसिद्धि
NIA ने तेज जांच कर अदालत को मजबूत केस दिया।
UA(P) के तहत पहली ऐसी सजा।
पुलवामा सजा vs अन्य आतंकी केस अंतर जानें
यह तालिका दिखाती है NIA की सख्ती।
आतंक सहयोग पर NIA की अगली चालें
ऐसे और केस आ सकते हैं। सरकार आतंक मुक्त
कश्मीर चाहती है। स्थानीय सहयोग रोकना जरूरी।
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