दिल्ली-एनसीआर में सेकेंड हैंड कार बाजार में फर्जी कागज़ात, चोरी और क्लोनिंग के जरिए बड़ी तादाद में पुरानी गाड़ियों की गैरकानूनी खरीद-बिक्री उजागर हुई। पुलिस और प्रशासन ने बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया
दिल्ली एनसीआर में पुरानी अवैध सेकंड हैंड वाहन बाजार नकली आरसी, बीमा और चेसिस नंबर के जरिये जालसाजी की साजिश
दिल्ली एनसीआर में अवैध सेकंड हैंड गाड़ियों के बाजार में नकली आरसी, बीमा और चेसिस नंबर के जरिये बड़ी जालसाजी की जा रही है। ऐसे फर्जी दस्तावेजों के सहारे चोरी, क्लोनिंग और गैरकानूनी खरीद-फरोख्त का संगठित गिरोह लगातार सक्रिय है।
पुरानी गाड़ियों का बढ़ता बाजार

दिल्ली-एनसीआर का सेकेंड-हैंड कार बाजार आसान सौदों और सस्ते दामों के कारण ग्राहकों को आकर्षित करता है, लेकिन इसी में अपराधियों को भी छुपने का मौका मिलता है।
फर्जीवाड़े के नए तरीके
इस अवैध बाजार में चोरी की गाड़ियों को नकली आरसी, बीमा और आईडी के साथ बेचा जाता है। चेसिस/इंजन नंबर बदलकर उन्हें जायज दिखाने की कोशिश होती है।
पुलिस का बड़ा खुलासा
दिल्ली पुलिस ने कई बार छापेमारी कर बड़े गिरोह का
पर्दाफाश किया है, जिसमें 20 से अधिक हाई-एंड
गाड़ियों की क्लोनिंग कर फर्जी विक्रय किया गया।
ऑनलाइन धोखाधड़ी का जाल
ऑनलाइन पोर्टल्स पर झूठे दस्तावेजों के साथ वाहन
की लिस्टिंग कर असली मालिक का भरोसा जीतकर
गाड़ी और कागज लेकर भाग जाना भी आम हो गया है।
कानून और प्रशासन की भूमिका
आरटीओ का रोल केवल ओनरशिप ट्रांसफर तक सीमित है,
जिससे धोखाधड़ी के मामलों में सही समय
पर कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।
आम जनता के लिए सावधानी
ऑरिजिनल कागज़, चेसिस और इंजन नंबर की
मौके पर खुद जांच करें, और हर बार आरसी
ट्रांसफर और नामांतरण फॉर्म तुरंत जमा करें।
सुरक्षा और समाज पर असर
अवैध सेकंड-हैंड गाड़ियों का नेटवर्क न केवल
खरीदारों के लिए खतरा है बल्कि आतंकवाद और
अपराध की गतिविधियों में भी
ऐसे वाहनों का इस्तेमाल बढ़ा है।











