बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अभियोगों में दोषी ठहराते हुए अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत (ICT) ने फांसी की सजा सुनाई है। 400 पेज के इस फैसले में उनके खिलाफ गंभीर सबूत
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को मिली मौत की सजा, ICT का 400 पेज का ड्राफ्ट छह भागों में पढ़ा गया
#बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को 17 नवंबर को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने मौत की सजा सुनाई है। इस मामले का 400 पेज का ड्राफ्ट छह भागों में पढ़ा गया, जिसमें शेख हसीना पर जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन में हुई हिंसा के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों और 1,400 मौतों में उनकी भूमिका के गंभीर आरोप शामिल थे।
परिचय

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को आईसीटी ने 17 नवंबर 2025 को मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। यह फैसला जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलनों में हुई हिंसा से जुड़ा है जिसमें 1400 से अधिक लोग मारे गए थे।
अपराध और आरोप
शेख हसीना पर लगाए गए मुख्य आरोप हैं प्रदर्शनकारियों की हत्या का मास्टरमाइंड होना हेलीकॉप्टर और ड्रोन के जरिए सिविलियनों पर फायरिंग का आदेश देना छात्र कार्यकर्ताओं की हत्या और हिंसा भड़काने के लिए बयान देना मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध करना
ट्रायल प्रक्रिया
ट्रायल शेख हसीना की अनुपस्थिति में हुआ क्योंकि वे भारत में निर्वासन में हैं। 400 पेज का विस्तृत ड्राफ्ट छह भागों में पढ़ा गया जिसमें गवाहों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और रिपोर्टों को शामिल किया गया।
न्यायालय का फैसला और टिप्पणियां
न्यायाधीशों ने पाया कि शेख हसीना ने सत्ता में बने रहने के लिए बल का सहारा लिया। ढाका पुलिस और सेना के साथ मिलकर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा कराई गई। हेलीकॉप्टर से सिविलियन पर फायरिंग कराना और घायल प्रदर्शनकारियों को इलाज से वंचित रखना भी साबित हुआ।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में भारी
भूचाल लेकर आया है। शेख हसीना समर्थक
इसे राजनीतिक बदला करार दे रहे हैं जबकि पीड़ित
परिवार इसे न्याय मान रहे हैं। अवामी लीग पार्टी और
उनके वकीलों ने फैसले के खिलाफ अपील की योजना बनाई है।
निष्कर्ष
शेख हसीना को सुनाई गई यह फांसी की सजा
बांग्लादेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद
मोड़ है, जो देश और क्षेत्र की राजनीति को
गहराई से प्रभावित करेगा।
भविष्य की संभावनाएं
इस फैसले के खिलाफ अपील प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था भी
इस मामले को देख सकती हैं।
आगामी चुनाव और राजनीतिक स्थिरता
पर इसका असर महत्वपूर्ण होगा।











