मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने से पापों की क्षमा होती है और जीवन के रिश्ते मधुर बनते हैं। इस पावन दिन व्रत और भक्ति का विशेष महत्व है।
मोक्षदा एकादशी पूजा विधि, तिथि और इसके धार्मिक महत्व के बारे में
#मोक्षदा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की पूजा के साथ किया जाता है, जो जन्ममरण के बंधन से मुक्ति दिलाता है। यह पावन तिथि दिसंबर 1, 2025 को है, जिसे गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है, जो मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था, इसलिए इसे गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन पूजा विधि में स्वच्छ स्नान के बाद भगवान विष्णु या कृष्ण की पूजा करें, व्रत का संकल्प लें, और कृष्ण चालीसा या विष्णु स्तुति का पाठ करें।
परिचय

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है, जिसे मोक्ष प्रदान करने वाली माना जाता है।
तिथि और मुहूर्त
इस साल मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर 2025 को है, और इसके पूजा के शुभ मुहूर्त सुबह 6:56 से 8:15 तक होते हैं।
पूजा विधि
इस दिन स्नान कर भगवान श्रीकृष्ण और विष्णु की पूजा करें, व्रत का संकल्प लें और कृष्ण चालीसा का पाठ करें।
धार्मिक महत्व
माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से पापों
की क्षमा होती है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गीता जयंती के साथ संबंध
मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र
में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था,
इसलिए इसे गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
व्रत का पारण
एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी को पारित
किया जाता है, जिसमें ब्राह्मणों को दान दिया जाता है।
जीवन में प्रभाव
इस दिन पूजा करने से जीवन में खुशहाली
आती है और रिश्ते मधुर बनते हैं, जिससे
आध्यात्मिक उन्नति होती है।











