उत्तर प्रदेश संपत्ति विभाजन UP को आसान किया। नई व्यवस्था से बिना कोर्ट के तुरंत बंटवारा, कागजी कार्रवाई सरल। जानें कैसे मिलेगा लाभ।
उत्तर प्रदेश संपत्ति विभाजन योगी कैबिनेट का ऐतिहासिक निर्णय
योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में संपत्ति विभाजन प्रक्रिया को क्रांतिकारी रूप से सरल बना दिया। अब बिना कोर्ट के 90 दिनों में तहसील स्तर पर बंटवारा संभव।
योगी कैबिनेट का संपत्ति बंटवारा क्रांति

योगी सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश में संपत्ति विभाजन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया। अब बिना लंबी अदालती जंग के 90 दिनों में बंटवारा संभव। तहसील स्तर पर ही सेटलमेंट अफसर फैसला लेंगे। इससे लाखों परिवारों को राहत मिलेगी। पुरानी प्रक्रिया में सालों लगते थे।
संपत्ति बंटवारे की 5 पुरानी परेशानियां
पहले उत्तर प्रदेश में संपत्ति बंटवारा कोर्ट के चक्कर, वकील फीस और सालों इंतजार का पर्याय था। भाई-भाई के बीच झगड़े आम। नई व्यवस्था में राजस्व विभाग ही निपटारा करेगा। कोई स्टे नहीं, तुरंत अमल। इससे पारिवारिक कलह कम होगा।
नई व्यवस्था के 7 बड़े फायदे
90 दिनों में बंटवारा। तहसील स्तर कार्य। कोर्ट फीस शून्य। पारदर्शी मूल्यांकन। ऑनलाइन आवेदन। विवाद समाधान टीम। महिलाओं को प्राथमिकता। योगी सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया का हिस्सा।
आवेदन कैसे करें? स्टेप-बाय-स्टेप
सबसे पहले भूलेख पोर्टल पर लॉगिन। संपत्ति विवरण अपलोड।
सहमति पत्र संलग्न। तहसीलदार को आवेदन। 30 दिन में जांच, 60 में फैसला।
असहमति पर अपील का प्रावधान। सारी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैकिंग।
जरूरी दस्तावेजों की पूरी लिस्ट
पैतृक संपत्ति के राजस्व रिकॉर्ड सभी वारिसों के आधार कार्ड
सहमति पत्र (नोटरी से) संपत्ति का मार्केट वैल्यू सर्टिफिकेट
मृत्यु प्रमाणपत्र (यदि लागू) बैंक खाता विवरण सभी
किन क्षेत्रों में तुरंत लागू
लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा, मेरठ डिवीजन में पहली फेज।
ग्रामीण इलाकों में प्राथमिकता। शहरी संपत्तियों परविशेष फोकस।
6 महीने में全省 लागू। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 10 जिलों में शुरू।
योगी सरकार का जनहितकारी कदम
यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोगों के लिए वरदान।
पारिवारिक विवाद 40% कम होने का अनुमान।
राजस्व संग्रह में भी वृद्धि। डिजिटल गवर्नेंस का बेहतरीन उदाहरण।
अन्य राज्यों के लिए मॉडल।











