दिल्ली से भी बदतर बिहार की हवा! पटना समेत 5 शहरों में AQI खतरनाक, सांस लेना दूभर। जानें कारण, असर और बचाव तुरंत अलर्ट
दिल्ली से भी बदतर बिहार पटना का AQI 323-424 तक पहुंचा, दिल्ली से बदतर
पटना का AQI 323-424 तक पहुंच गया है, जो दिल्ली से भी बदतर स्तर पर है और सांस लेना खतरनाक बना देता है।
वाहनों का धुआं, पराली जलाना और कम हवा की गति मुख्य कारण हैं, जिससे PM2.5 कण हवा में जमा हो रहे हैं।
पटना की जहरीली हवा दिल्ली को पीछे छोड़ा

पटना में जनवरी 2026 में AQI 323 (हैजर्डस) तक पहुंच गया, जो दिल्ली के मुकाबले बदतर है। मुख्य प्रदूषक PM2.5 और PM10 हैं, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कम हवा की गति ने प्रदूषण को फंसाया है। निवासियों को मास्क पहनने और घर में रहने की सलाह दी जा रही है।
बिहार के 5 शहरों में AQI 200 पार
पटना, आरा (266), बिहार शरीफ (261), समस्तीपुर (258) और हाजीपुर (229) में AQI खराब श्रेणी में है। ये आंकड़े CPCB के हैं, जो सर्दियों की समस्या दर्शाते हैं। ठंडे मौसम में प्रदूषण जमा होता है, जिससे विजिबिलिटी कम हो जाती है।
स्वास्थ्य पर असर सांस लेना मुश्किल
उच्च AQI से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में। पटना के समनपुरा जैसे इलाकों में ‘रेड जोन’ घोषित हो चुका है। PM10 स्तर 139 µg/m³ से ऊपर है, जो खतरनाक है। डॉक्टर दवाओं के साथ एयर प्यूरीफायर सुझा रहे हैं।
प्रदूषण के प्रमुख कारण
बिहार में वाहनों का धुआं, पराली जलाना और फैक्ट्रियां मुख्य वजहें हैं। सर्दियों में इनवर्जन लेयर प्रदूषण को नीचे रखती है। पिछले 7 दिनों में पटना का AQI 89 से 424 तक उछला। सरकार को GRAP जैसे उपाय अपनाने चाहिए।
दिल्ली vs बिहार तुलना
दिल्ली का AQI अक्सर 300 के आसपास रहता है,
लेकिन पटना ने 335 रिकॉर्ड कर इसे पीछे छोड़ा।
बिहार के 10 शहरों में 200+ AQI दर्ज। हाजीपुर 625 तक पहुंचा,
जो देश के टॉप प्रदूषित में शुमार है। दोनों जगहों पर समान समस्या,
लेकिन बिहार में नियंत्रण कम।
सरकार के उपाय और सुझाव
बिहार प्रदूषण बोर्ड ने रेड जोन चिह्नित किए हैं, लेकिन ठोस
कार्रवाई कम। लोग N95 मास्क, INDOOR एक्सरसाइज करें।
वृक्षारोपण और इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ाने की जरूरत।
AQI ऐप्स से रीयल-टाइम अपडेट लें।
भविष्य की चिंता क्या करें आम नागरिक
2026 में पटना का AQI ट्रेंड Severe दिख रहा है
(351-409)। नागरिक वाहन शेयरिंग करें, धूल न फैलाएं।
लंबे समय में पॉलिसी बदलाव जरूरी। स्वच्छ हवा के लिए
सामूहिक प्रयास से ही सुधार संभव।











